वो अपने घर चला गया अफ़्सोस मत करो

इतना ही उस का साथ था अफ़्सोस मत करो

इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो

इस बार तुम को आने में कुछ देर हो गई
थक-हार के वो सो गया अफ़्सोस मत करो

दुनिया में और चाहने वाले भी हैं बहुत
जो होना था वो हो गया अफ़्सोस मत करो

इस ज़िंदगी के मुझ पे कई क़र्ज़ हैं मगर
मैं जल्द लौट आऊँगा अफ़्सोस मत करो

ये देखो फिर से आ गईं फूलों पे तितलियाँ
इक रोज़ वो भी आएगा अफ़्सोस मत करो

वो तुम से आज दूर है कल पास आएगा
फिर से ख़ुदा मिलाएगा अफ़्सोस मत करो

बे-कार जी पे बोझ लिए फिर रहे हो तुम
दिल है तुम्हारा फूल सा अफ़्सोस मत करो

— Bashir Badr

More by Bashir Badr

Other ghazal from the same pen

See all from Bashir Badr →

Environment Shayari collection

Shers of environment shayari collection.

All Environment Shayari collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling