jhagda ye aaj ka phir kal bhi to ho saktaa hai | झगड़ा ये आज का फिर कल भी तो हो सकता है

  - Bhuwan Singh

झगड़ा ये आज का फिर कल भी तो हो सकता है
पर ये जो मसअला है हल भी तो हो सकता है

ये ज़रूरी तो नहीं है कि सॅंभल ही जाए
'इश्क़ में दिल मिरा पागल भी तो हो सकता है

यूँँ मुसलसल मिरे रोने की वजह मत खोजो
मेरी इन आँखों में बादल भी तो हो सकता है

तैरना आए तो भी तैर नहीं सकते तुम
दरिया ये 'इश्क़ का दलदल भी तो हो सकता है

तुझको वो दिख गए जो गाड़ियों से आए हैं
कोई आशिक़ तिरा पैदल भी तो हो सकता है

कब कहा मैंने कि तू ज़िंदगी भर साथ रहे
यार तू साथ में दो पल भी तो हो सकता है

  - Bhuwan Singh

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