झगड़ा ये आज का फिर कल भी तो हो सकता है
पर ये जो मसअला है हल भी तो हो सकता है
ये ज़रूरी तो नहीं है कि सॅंभल ही जाए
'इश्क़ में दिल मिरा पागल भी तो हो सकता है
यूँँ मुसलसल मिरे रोने की वजह मत खोजो
मेरी इन आँखों में बादल भी तो हो सकता है
तैरना आए तो भी तैर नहीं सकते तुम
दरिया ये 'इश्क़ का दलदल भी तो हो सकता है
तुझको वो दिख गए जो गाड़ियों से आए हैं
कोई आशिक़ तिरा पैदल भी तो हो सकता है
कब कहा मैंने कि तू ज़िंदगी भर साथ रहे
यार तू साथ में दो पल भी तो हो सकता है
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