सिवाए इश्क़ के कुछ भी बचा नहीं है क्या
क़ज़ा का और कोई रास्ता नहीं है क्या
दिखावा करने लगे तुम भी मुस्कुराने का
तुम्हारी ज़िंदगी में भी मज़ा नहीं है क्या
तुझी से इश्क़ है लिपटा तू ज़िंदा कैसे है
अभी तलक तुझे ख़ंजर चुभा नहीं है क्या
कभी भी माँगा हुआ मिल नहीं सका मुझ को
तू दुनिया भर का है मेरा ख़ुदा नहीं है क्या
जिसे भी चाहूॅं यक़ीनन किसी का साथी है
ख़ुदा मेरे लिए कोई बना नहीं है क्या
— Bhuwan Singh















