कर लूँ मैं दुबारा 'इश्क़ ये मजाल भी नहीं
तूने मुझ को छोड़ा है मुझे मलाल भी नहीं
मुझको जितना भी सताना है हाँ तू सता ले जान
तुझको मैं सताऊँ ये मिरा ख़याल भी नहीं
था बुरा भी हाल तब कोई न पूछा ख़ैरियत
अब न पूछ जान ये कोई सवाल भी नहीं
जब किसी भी 'इश्क़ में हाँ जिस्म की तलाश हो
सच कहूँ मैं ऐसे 'इश्क़ तो हलाल भी नहीं
कौन कामयाब है ऐ जान राह-ए-इश्क़ में
इसका तेरे पास तो यूँँ इक मिसाल भी नहीं
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