Meaning of

क़ुम

qum • قم

उठना; खड़ा होना; जागना

rise; stand up; awaken

اٹھنا; کھڑا ہونا; جاگنا

Arabic

न हो क़मीज़ तो घुटनों से पेट ढक लेंगे ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए — Dushyant Kumar
हज़ारों क़ुमक़ुमों से जगमगाता है ये घर लेकिन जो मन में झाँक के देखूँ तो अब भी रौशनी कम है — Aanis Moin
आप मुझ को बहुत पसंद आईं आप मेरी क़मीज़ सीजिएगा — Jaun Elia
मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया — Fana Bulandshahri
हम परवरिश-ए-लौह-ओ-क़लम करते रहेंगे जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे — Faiz Ahmad Faiz
मैं आ रहा हूँ अभी चूम कर बदन उस का सुना था आग पे बोसा रक़म नहीं होता — Shanawar Ishaq
मैं आ रहा हूँ अभी चूम कर बदन उस का सुना था आग पे बोसा रक़म नहीं होता — Shanawar Ishaq

'क़ुम' शब्द नींद या निष्क्रियता से उठने की छवि प्रस्तुत करता है। अपने मूल अर्थ में, यह शारीरिक गति को दर्शाता है, आराम से गतिविधि की ओर संक्रमण। कविता ने इस शब्द को आत्मा और मन के जागरण का प्रतीक बना लिया है, जो विपत्ति के खिलाफ उठने का आह्वान करता है।

'क़ुम' का उपयोग कवि क्रिया और दृढ़ता को प्रेरित करने के लिए करते हैं। यह अक्सर उन पंक्तियों में आता है जो किसी की क्षमता के जागरण या उत्पीड़न के खिलाफ उठने का आह्वान करती हैं। यह शब्द स्थिरता के विपरीत है, गति और परिवर्तन का आग्रह करता है।

कविता में, 'क़ुम' उठने का आह्वान है, एक संभाव्यता की फुसफुसाहट जो साकार होने की प्रतीक्षा कर रही है।