Meaning of

यतीम

yateem • یتیم

अनाथ; माता-पिता के बिना

orphan; one without parents

یتیم; والدین کے بغیر

Arabic

ज़ुल्म मज़लूमों पे ढाना छोड़ दो
हक़ यतीमों का दबाना छोड़ दो

ये नहीं कर सकते तो बेहतर है ये
सर को सज्दे में झुकाना छोड़ दो

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यतीमों की तरह बस पाल रक्खा है इन्हें हम ने
हमें जो दुख मिले हैं वो हमारे दुख नहीं लगते

किसी की आँख में रह कर किसी के ख़्वाब देखे हैं
हजारों कोशिशें की पर किनारे दुख नहीं लगते

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ख़ुशनसीबी है तुम्हारी सर पे है जो माँ का हाथ
हम यतीमों को पता है ये दुआ क्या चीज़ है

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मिरे माँ बाप जन्नत से नज़र रखते हैं मुझ पर अब
मिरे दिल में यतीमों के लिए इक ख़ास कोना है

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वो घूमती मुझ को दिखी तो मैं सवालों में रहा
थी तो वही मैं रातभर जिस के ख़यालों में रहा

अब तक समेटे है कि ख़ुश्बू वो फ़िरे है हर दिशा
वो एक दिन जो फूल बस कुछ देर बालों में रहा

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क़ल्ब-ए-हज़ी मता-ए-जाँ यूँँ शाद कीजिए
कसरत के साथ आप हमें याद कीजिए

दौलत में चाहते हो इज़ाफा अगर शजर
तो बेकसों यतीमों की इमदाद कीजिए

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क्यूँँ किसी को यतीम कहते हो
सारी दुनिया यतीमख़ाना है

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माँ के होने की अज़मत से हो तुम भी ना वाक़िफ
क्या है ज़िंदगी बिन माँ पूछो ये यतीमों से

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जो यतीमों को अपना नहीं मानते
वो ख़ुदा की ये रहमत नहीं जानते

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अगर यतीम-ओ-ग़रीब की तुम मदद करोगे जज़ा मिलेगी
सुकून-ए-क़ल्ब-ए-हज़ी मिलेगा ख़ुदा नबी की रज़ा मिलेगी

कभी भी अपने दिलों के अंदर किसी से बुग़्ज़-ओ-हसद न रखना
निज़ाम-ए-रब-उल-क़दीर है ये ख़ता करोगे सज़ा मिलेगी

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ज़ुल्म मज़लूमों पे ढाना छोड़ दो
हक़ यतीमों का दबाना छोड़ दो

ये नहीं कर सकते तो बेहतर है ये
सर को सज्दे में झुकाना छोड़ दो

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यतीमों की तरह बस पाल रक्खा है इन्हें हम ने
हमें जो दुख मिले हैं वो हमारे दुख नहीं लगते

किसी की आँख में रह कर किसी के ख़्वाब देखे हैं
हजारों कोशिशें की पर किनारे दुख नहीं लगते

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'यतीम' शब्द एक गहरी एकाकीपन और असुरक्षा की भावना को जगाता है। कविता में, यह केवल माता-पिता की अनुपस्थिति का प्रतीक नहीं है, बल्कि एक गहरे अस्तित्वगत अकेलेपन का भी। जीवन के विशालता में भटकती हुई एक अनाथ आत्मा की छवि हृदयस्पर्शी और मार्मिक है।

'यतीम' का उपयोग कवि अक्सर त्याग और लालसा की थीम को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक हृदय को निराश्रित प्रेम द्वारा छोड़े गए या एक आत्मा को एक ऐसे संसार में अपनापन खोजते हुए दर्शा सकता है जो उदासीन लगता है।

अपने काव्यात्मक सार में, 'यतीम' उन लोगों की मौन पुकारों को पकड़ता है जो अकेले भटकते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो हृदय की गहरी इच्छाओं के साथ गूंजता है।