
वो घूमती मुझ को दिखी तो मैं सवालों में रहा
थी तो वही मैं रातभर जिस के ख़यालों में रहा
अब तक समेटे है कि ख़ुश्बू वो फ़िरे है हर दिशा
वो एक दिन जो फूल बस कुछ देर बालों में रहा
— Umashankar Lekhwar
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