Umashankar Lekhwar

Umashankar Lekhwar

@Umashankar

Umashankar prasad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Umashankar prasad's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

रहेगा अब अगर ग़म ज़िन्दगी भर तो रहेगा ये तेरा आशिक़ हुआ मैं बस तेरी आदत न हो पाया — Umashankar Lekhwar
मोहब्बत के अलावा अब न होगा रास्ता कोई नहीं महबूब तो तुझ सेे न होगा वास्ता कोई — Umashankar Lekhwar
अगर वो फिर कभी आए ख़यालों में तो पूछूँगा तेरे वो ख़्वाब अब तक किस लिए मुझ को जगाते थे — Umashankar Lekhwar
किसी को क्या ख़बर कैसे बिता लेते हैं अपने दिन बिना उन के कि जिनपर वो हर इक दिन हक़ जताते थे — Umashankar Lekhwar
तुझे मैं भूल जाऊँगा अगर बेहतर मिला कोई भुला तो दूँ तेरे ये लफ़्ज़ फिर भी वक़्त लगता है — Umashankar Lekhwar
सजाया तो उसे होगा मगर अब ये तमन्ना है निहारूँ मैं उसे फिर आज रंगों से सजाकर के — Umashankar Lekhwar
आस तो मुझे अब भी है कि लौट आए फिर जो गुज़र गया शायद वक़्त वो न आएगा। — Umashankar Lekhwar

Ghazal

तुम मिले जिस सेे भी मिल के फिर है उस का दिल दुखा पूछता है दिल मेरा ये यूँँ भी तुम कहते हो क्या क्यूँ रहूँ मैं चुप जो मुझ सेे दूर तू जाता रहे क्यूँ तुझे आवाज़ दूँ मैं लौट आ तू लौट आ इस लिए शायद कभी तुम ने नहीं देखा उदास मैं तुम्हारे सामने आ कर नहीं ऐसा रहा जब जुदा होना है हम को तो रहूँ मैं दूर ही किस लिए नाराज़ हूँ ऐसा भी तुम ने क्या कहा पूछना है पूछ लो आ कर के तुम भी देख लो हाल जो दिल का हुआ टूटा हुआ बिखरा हुआ और कितने झूठ ख़ुद से तुम कहोगे 'लेखवार' उस की रंजिश को भी तुम ने उस की चाहत कह दिया — Umashankar Lekhwar
जहाँ होगी मुझे रंजिश उसी का साथ दोगी तुम छुड़ा कर हाथ हाथों से कहो फिर क्या कहोगी तुम मुझे तो डर सा लगता है चले आएँगे बाराती सजा मेहँदी हसीं हाथों में क्या दुल्हन बनोगी तुम सुनो दुल्हन बनोगी तुम यक़ीं होता नहीं मुझ को अगर सच है यक़ीं मानो बहुत सुंदर लगोगी तुम सभी मैं भूल जाऊँगा मिटा दूँगा ख़याल अपना मगर मेहँदी लगा हाथों में क्या दुल्हन बनोगी तुम सुनो मेहँदी लगे वो हाथ भी मैं छू न पाऊँगा उन्हें मैं देख भर लूँगा मगर सुंदर लगोगी तुम वहाँ होगी मोहब्बत भी ज़रूरत भी हिफ़ाज़त भी यहाँ है बस ज़रूरत फिर ज़रूरत क्यूँ चुनोगी तुम कभी यूँँ ही अचानक काश अगर मैं याद आऊँ तो मुझे ये जानना है याद कर के क्या करोगी तुम ये सब जो चाहता कहना कभी क्या कह भी पाऊँगा अकेले बैठ कर सारी मेरी बातें सुनोगी तुम कहा है क्या मेरी ख़ातिर कभी जो काश तुम पूछो कहूँ तुम सेे या पूछूँ मैं मेरी दुल्हन बनोगी तुम — Umashankar Lekhwar
छुआ है फूल ने अब ख़ुश्बूओं से रोज़ महकूँगा मेरी ख़्वाहिश है ये मैं कब तेरे आँचल में दम लूँगा तेरी मौजूदगी मैं ने मगर सपनों में भी चाही भरम में इतना बहका हूँ कि अब इक उम्र बहकूँगा शिकायत हो अगर तुझ को कि कोई ख़ामुशी समझे तेरी मैं मुस्कुराहट भी हँसी को भी मैं समझूँगा किसी भी दिन बहाने से मेरे तुम पास आ जाना अगर तुम को समझ पाया न तो मैं पूछ ही लूँगा कभी हाथों में रख कर हाथ कहना हो जो वो कहना बहुत बातें मैं करता हूँ सभी मैं तुम से कर लूँगा सताता है तेरा वो हाथ मुझ को ग़ैर हाथों में सहा जाता नहीं पर ख़ुश है तू इस में तो सह लूँगा — Umashankar Lekhwar
वक़्त गुज़रा तो न जाने कैसे हालों में मिलूँगा ढूँढ़ना तुम को तुम्हारे घर के जालों में मिलूँगा तुम जो आओ तो अँधेरों से गुज़र के पास आना मैं तभी शायद तुम्हें बढ़ते उजालों में मिलूँगा मैं मिलूँगा तुम को रस्ते के किनारे घास जैसे मैं नहीं हूँ फूल वो जो तुम को बालों में मिलूँगा तुम भी क्या रातों को जग के देर तक सोती नहीं हो काश तुम भी ख़्वाब देखो तुम को गालों में मिलूँगा यूँँ डरा हूँ मैं अँधेरे से मुझे है जगमगाना मैं उजालों के क़रीं जलती मशालों में मिलूँगा क्या तुम्हें सचमुच मुहब्बत थी अगर थी क्यूँ न पाई मैं तुम्हें उलझा कुछ ऐसे ही सवालों में मिलूँगा — Umashankar Lekhwar
उसे हँसते हुए भी देखा शायद ग़म तो ज़्यादा है निगाहें उस की क़ातिल और चेहरा कितना सादा है ज़माने भर में है मशहूर बनके ख़्वाब आया है मगर चुप हूँ मेरा दिल पूछता है क्या इरादा है मेरी बातों में उस का ज़िक्र तो है ज़िक्र भी तो ये किसी के बोझ जैसा है कि जो इस दिल पे लादा है हमें लगता नहीं है इस ज़माने में कहीं ग़म है किसी को रोते देखा तो लगा सचमुच में ज़्यादा है किसी के ख़्वाब लिखता हूँ मगर मैं चुप ही रहता हूँ मुझे मालूम है ये ग़म मेरे ग़म का भी आधा है सुनो मैं जो भी लिखता हूँ मगर क्या ख़ाक लिखता हूँ हमेशा पढ़ने वालों ने लिखा मुझ सेे भी ज़्यादा है — Umashankar Lekhwar

Nazm

"मैं इंतिज़ार करूँँगा" न आएँगी कोई तितलियाँ फूलों पर न आएँगी कभी बहारें मोहब्बत में आ कर तुम पास मेरा वहम तोड़ दोगी इन साँसों को गिनते मैं इंतिज़ार करूँँगा वफ़ाएँ किताबें दुआएँ तुम्हारी वो ख़ुश्बू न फूल ला कर के देगा कोई तोहफ़े में मगर यूँँ ही भटकते मैं इंतिज़ार करूँँगा मैं ने तुम्हारे पाँव देखे कितने प्यारे थे मगर आएँगे न मेरे साथ दो क़दम भी तुम ने पहनी थी जो पायल इन में लगा घुँघरू चलो तुम मेरे साथ मैं इंतिज़ार करूँँगा तुम्हें देखा आज ये किसी से कह आया यक़ीनन नाम न लिया मगर कह आया सुन रहा था कितने ग़ौर से कि जैसे वो आईना न हो सचमुच में तुम हो कि कहता वो अगर मुझ सेे कुछ कहता न आए तो भी उस का इंतिज़ार करना यही सोच कर ये सोचा था मैं ने तुम आओ न आओ मैं इंतिज़ार करूँँगा — Umashankar Lekhwar
"भूल जाऊँगा मैं" मैं भूल रहा हूँ वो बातें, जो शायद हुई थी तुझ सेे, मेरे एक ख़्वाब की तलाश में ख़्वाब वो जिन के साथ गुज़री थी मेरी शा में मैं ने भुला दिया है तुझे, ज़माने में मसरूफ़ रह कर हाँ, जब कभी मैं तन्हा होता हूँ तो वो तन्हा शा में, मेरी ये बेसब्र आँखें ढूँढ़ती है तुझे, बीते उन लम्हों में कहीं जो गुज़ारे थे मैं ने तेरे ख़्वाबों के साथ अक्सर रात होने तक, मैं पाता हूँ ख़ुद को उलझा हुआ तेरी यादों में कहीं गुज़र जाएँगे ये दिन भी यूँँ ही जैसे गुज़ार दिए कुछ तेरी दीवानगी में ये तन्हाई तुझे याद तो करती है मगर गुज़रते रहे जो ये दिन यूँँ ही तो तुझे, भूल जाऊँगा मैं — Umashankar Lekhwar