
कभी तुम सेे थी नाराज़ी कभी तुम सेे शिकायत थी
ज़माना वो भी गुज़रा जब हमें तुम से मोहब्बत थी
बँधाता रह गया ढाढस दिया जो रातभर जलकर
कहा सबने हुई जब सुब्ह उसे जलने की आदत थी
— Umashankar Lekhwar
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