न जाने बात क्या थी और जाने कैसा रिश्ता था
जो मैं ने खो दिया है उस का छूना अच्छा लगता था
न जाने कौन थी वो लड़की उस से क्यूँ वो रिश्ता था
नहीं था जान पाता कुछ भी पर मैं उस को छूता था
यक़ीं मानो कि मैं ने ख़्वाब भी उस के नहीं देखे
मगर फिर जो जहाँ उस ने दिखाया मुझ को वो क्या था
हुआ है जो मैं तो अनजान था अनजान थी वो भी
उसे शायद भुला पाऊँ न जो भी उस से रिश्ता था
— Umashankar Lekhwar















