Sagheer Lucky

Sagheer Lucky

@sageer7518919424

Sagheer Lucky shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sagheer Lucky's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

करवट बदल के शिकनों को चादर पे छोड़ के रोया है कोई रात भर आँखें निचोड़ के — Sagheer Lucky
अपने अंदर की हर कमी रख दे रू-ब-रू लाके ज़िन्दगी रख दे — Sagheer Lucky
फ़क़त उस का ही चेहरा अब दिखाई देता है हर सू मेरी नज़रों में मेरी जाँ समाई ही है कुछ ऐसे — Sagheer Lucky
तुम्हारे नाम लम्हे ज़िन्दगी के कर दिए हैं सब के अब चाहे भी कोई तो हमारा हो नहीं सकता — Sagheer Lucky
सुपुर्द-ए-खाक़ कर के इस जुनून-ए-शायरी को अब ये सोचा है मुहब्बत से किनारा कर लिया जाए — Sagheer Lucky
तन्हाई के हुजूम में वो एक तेरी याद जैसे अँधेरी रात में जलता हुआ दिया — Sagheer Lucky
चलो हम मान लेते हैं मुहब्बत हो गई हम को क़ुबूल-ए-जुर्म करते हैं बताओ क्या सज़ा दोगे — Sagheer Lucky
ज़िन्दगी तेरी हक़ीक़त ने सताया इतना अब कभी खुल के जो हँसता हूँ तो रो पड़ता हूँ — Sagheer Lucky
तुम मेरे हाथ पे सोई हो है ये एहसाँ मगर मेरे सीने पे जो सोती तो मज़ा और ही था — Sagheer Lucky
लगाकर हाथ में मेहँदी वो जुल्फ़ों का परे करना हिनाई हाथ जब देखूँ तुम्हारी याद आती है — Sagheer Lucky
तुम्हें हम क़ैद रक्खेंगे क़यामत तक तो सीने में फ़क़त कहने को कह देते हैं आज़ादी मुबारक हो — Sagheer Lucky
वो छोड़ कर गए हैं तो दिल है बहुत उदास ख़ामोशियों से कह दो ज़रा गुफ़्तगू करें — Sagheer Lucky
किसी भी ग़ैर का सोचूँ तो जानाँ किस तरह सोचूँ तुम्हारी याद से फ़ुर्सत तो मिलती ही नहीं मुझ को — Sagheer Lucky
ऐ दिल तुझे तो उन को बुलाना ही चाहिए वो आएँ या न आएँ ये मर्ज़ी की बात है — Sagheer Lucky
वो हम सेे दूर होकर भी हमारे दिल में रहते हैं अब इस सेे बेश एजाज़-ए-मुहब्बत और क्या होगा — Sagheer Lucky
अजब पागल सी लड़की है अजब ही हाल है उस का मैं इक पल दूर जाऊँ तो वो रोने बैठ जाती है — Sagheer Lucky
मैं तेरे क़ु्र्ब में इक रात गुज़ारूँ जो कभी मुझ को महसूस ये होगा कि मैं जन्नत में हूँ — Sagheer Lucky
मुहब्बत के सिरातों पर मिली हैं ठोकरें उस को वो जो चंचल सी लड़की थी बहुत ख़ामोश रहती है — Sagheer Lucky

Ghazal

तुम्हारी आँख में ठहरा हुआ हूँ कभी आँसू कभी सपना हुआ हूँ मैं किस के हाथ की ज़ीनत बनूँगा हिनाई शाख़ से टूटा हुआ हूँ तेरे दिल में जगह अपनी बना ली मैं ख़ुश्बू की तरह फैला हुआ हूँ समेटे आ के माला ही बना ले मैं बासी फूल सा बिखरा हुआ हूँ कोई सिलवट नहीं है बिस्तरों पर कई रातों का मैं जागा हुआ हूँ मुहब्बत की कशिश भारी पड़ी है तुम्हारे शहर में आया हुआ हूँ यहाँ कोई नहीं होता किसी का ख़ुशी तंगी से भी गुज़रा हुआ हूँ नहीं कुछ होश बाक़ी है ज़रा भी मुहब्बत में दिवानों सा हुआ हूँ अबस बच्चा समझते हैं अभी तक मैं हर इक दौर से गुज़रा हुआ हूँ जिसे वालिद की शफक़त मानते हो मैं उस की छाँव में बैठा हुआ हूँ अभी फ़ुर्सत नहीं है कुछ लकी जी बहुत से काम में उलझा हुआ हूँ — Sagheer Lucky