इक सुकूँ भरी नींदें टूटती चली जाएँछोड़ कर अकेला वो रूठती चली जाएँथी कभी तमन्ना अब दूर वो न हो मुझ सेलत है जो कि उस की अब छूटती चली जाएँ— Umashankar Lekhwar