सितारों की फ़ज़ाओं की न जाने किस ज़मीं से हो
नहीं सचमुच में तुम मालिक मेरे दिल की ज़मीं के हो
मुझे छू कर तुम्हारी साँस तन पे है छिड़क जाती
कहूँ मैं सच अगर देखो तो कितनी दूर बैठे हो
सुनो तुम दूर भी हो और तुम हो ख़ूब-सूरत भी
यक़ीं मानो मेरा सचमुच में तुम तो चाँद जैसे हो
मेरा तो ख़्वाब हो तुम और तुम को देख लेता हूँ
मेरे इस ख़्वाब के बाहर मगर सच कहना किस के हो
— Umashankar Lekhwar















