तुम मिले जिस सेे भी मिल के फिर है उस का दिल दुखा
पूछता है दिल मेरा ये यूँ भी तुम कहते हो क्या
क्यूँ रहूँ मैं चुप जो मुझ से दूर तू जाता रहे
क्यूँ तुझे आवाज़ दूँ मैं लौट आ तू लौट आ
इस लिए शायद कभी तुम ने नहीं देखा उदास
मैं तुम्हारे सामने आ कर नहीं ऐसा रहा
जब जुदा होना है हम को तो रहूँ मैं दूर ही
किस लिए नाराज़ हूँ ऐसा भी तुम ने क्या कहा
पूछना है पूछ लो आ कर के तुम भी देख लो
हाल जो दिल का हुआ टूटा हुआ बिखरा हुआ
और कितने झूठ ख़ुद से तुम कहोगे 'लेखवार'
उस की रंजिश को भी तुम ने उस की चाहत कह दिया
— Umashankar Lekhwar















