किया सब जो कहा दिल ने मगर लगता नहीं है दिल
नहीं अंजाम भी ऐसा कि जिस
में नाम हो दाख़िल
बनाता है ख़ुदा कच्चे खिलौने खेल में अपने
मुझे उस ने बनाया तो बनाया क्यूँ नहीं क़ाबिल
मेरी आँखें उसे हद से सिवा ख़्वाबों में रखती है
मगर ये दिल जो कहता है कि मैं उस के नहीं क़ाबिल
गुमाँ मुझ को है शामिल हूँ मोहब्बत करने वालों में
उसे देखा तो सोचा ये मगर शायद नहीं शामिल
— Umashankar Lekhwar















