"भूल जाऊँगा मैं"

मैं भूल रहा हूँ वो बातें, जो शायद
हुई थी तुझ से, मेरे एक ख़्वाब की तलाश में
ख़्वाब वो जिन के साथ गुज़री थी मेरी शा
में
मैं ने भुला दिया है तुझे, ज़माने में मसरूफ़ रह कर
हाँ, जब कभी मैं तन्हा होता हूँ
तो वो तन्हा शा
में, मेरी ये बेसब्र आँखें
ढूँढ़ती है तुझे, बीते उन लम्हों में कहीं
जो गुज़ारे थे मैं ने तेरे ख़्वाबों के साथ
अक्सर रात होने तक, मैं पाता हूँ
ख़ुद को उलझा हुआ तेरी यादों में कहीं
गुज़र जाएँगे ये दिन भी यूँ ही
जैसे गुज़ार दिए कुछ तेरी दीवानगी में
ये तन्हाई तुझे याद तो करती है
मगर गुज़रते रहे जो ये दिन यूँ ही
तो तुझे, भूल जाऊँगा मैं

— Umashankar Lekhwar

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