ik ladki se baat karo to lagta hai | इक लड़की से बात करो तो लगता है

  - Shadab Asghar

इक लड़की से बात करो तो लगता है
इस दुनिया को छोड़ के भी इक दुनिया है

  - Shadab Asghar

Baaten Shayari

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    ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं
    हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं

    जिस लड़की की बातें करते हैं सबसे
    उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
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    Gyan Prakash Akul
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    मुझे इक बात कहनी थी अगर मुझ को इज़ाज़त हो
    तुम्हीं मेरी मुहब्बत हो मुहब्बत हो मुहब्बत हो
    Shadab Asghar
    तुम्हें ये किसने कहा रब को नहीं मानता मैं
    ये और बात कि मज़हब को नहीं मानता मैं
    Bhaskar Shukla
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    तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
    तुम को देखें कि तुम से बात करें
    Firaq Gorakhpuri
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    वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं
    दिल-ए-बे-ख़बर मिरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा
    Amjad Islam Amjad
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    बात करते हुए बे-ख़याली में ज़ुल्फ़ें खुली छोड़ दी
    हम निहत्थों पे उसने ये कैसी बलाएँ खुली छोड़ दी

    साथ जब तक रहे एक लम्हे को भी रब्त टूटा नहीं
    उसने आँखें अगर बंद कर ली तो बाँहें खुले छोड़ दी
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    Khurram Afaq
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    मुझे अँधेरे से बात करनी है सो करा दो, दिया बुझा दो
    कुछ एक लम्हों को रौशनी का गला दबा दो, दिया बुझा दो

    रिवाज़-ए-महफ़िल निभा रहा हूँ बता रहा हूँ मैं जा रहा हूँ
    मुझे विदा दो, जो रोना चाहे उन्हें बुला दो, दिया बुझा दो
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    Vikram Gaur Vairagi
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    तमाम बातें जो चाहता था मैं तुमसे कहना
    वो एक काग़ज़ पे लिख के कागज़ जला दिया है
    Dipendra Singh 'Raaz'
    उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था
    ये बात मुझसे ज़ियादा उसे रुलाती थी
    Ali Zaryoun
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    रंग की अपनी बात है वर्ना
    आख़िरश ख़ून भी तो पानी है
    Jaun Elia
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    कैसे ये मान लें तु लकीरों में नहीं है
    हम ने भी कह दिया है तेरा हो के रहेंगे
    Shadab Asghar
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    ये जो कुछ लोग कुछ भी लिखते हैं
    तुम इसे शाइरी नहीं समझो
    Shadab Asghar
    दुआ में मांग लूं मैं उसको लेकिन
    फ़क़त पाना मेरा मक़सद नहीं है
    Shadab Asghar
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    उनकी निगाह-ए-शोख़ की बरकत नहीं मिली
    शहरत बहुत मिली है मुहब्बत नहीं मिली

    हम को निकाल फेंका गया बे-दिली के साथ
    हमको किसी के दिल में भी इज़्ज़त नहीं मिली

    सब को कहाँ मिला है जहाँ में तमाम कुछ
    दरवाजा मिल गया है मगर छत नहीं मिली

    उस को मिला है वो जो उसे चाहिए न था
    हम को मिला है ज़िस्म पर उल्फ़त नहीं मिली

    उम्रें गुज़र गईं तेरे दर पर खड़े-खड़े
    कैसे जो दिल मे आए इज़ाज़त नहीं मिली

    हाथों में हाथ डाल के हम ताज़ देखते
    लेकिन किसी भी हाथ की बैअत नहीं मिली

    कुछ इसलिए भी शेर सुनातें नहीं हैं जल्द
    हम को हमारे शेर की कीमत नहीं मिली
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    Shadab Asghar
    हम तुम्हें जान जान कहते थे
    जान तो सब की जानी होती है
    Shadab Asghar
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