हर एक लम्हा पुर-असरार है ख़याल रहे
तुम्हारे सर पे भी तलवार है ख़याल रहे
तुम अपने चेहरे ख़ुद अपनी निगाह से देखो
जो आइना है अदाकार है ख़याल रहे
मिरी सदा का किसी सम्त से जवाब तो दो
कि बाज़गश्त मुझे बार है ख़याल रहे
ये और बात बड़ी बेरुख़ी से मिलता है
मगर वो शख़्स मिरा यार है ख़याल रहे
मिरी तरह है नई नस्ल का भी ग़म लेकिन
ये ग़म भी रेत की दीवार है ख़याल रहे
बुलन्दियों को ग़लत ज़ावियों से मत देखो
तुम्हारे सर पे भी दस्तार है ख़याल रहे
शुआ-ए-मेहर की यारो ये नुक़रई तहरीर
बनाम-ए-साया-ए-दीवार है ख़याल रहे
ये 'इश्क़ गरचे 'सबा' पर भी दे तो भी क्या है
बदन में जान-गिरफ़्तार है ख़याल रहे
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