जान भी ख़तरे में है ईमान भी
हर तरफ़ है आग भी तूफ़ान भी
शहर सारा ही फ़रिश्तों का नहीं
शहर में बसते हैं कुछ इंसान भी
दोस्ती की हर अदा पहचानिए
दोस्ती है दर्द भी दरमान भी
ज़ख़्म दिल को दे गया सौग़ात में
ज़ुल्म कर के कर गया एहसान भी
सोचती हूँ प्यार का रिश्ता निभे
मसअला मुश्किल भी है आसान भी
वो मुझे अपना बना कर ऐ 'सबा'
ले गया मुझ सेे मेरी पहचान भी
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