paas aa kar haal poocha aapko zahmat hui | पास आ कर हाल पूछा आपको ज़हमत हुई

  - divya 'sabaa'

पास आ कर हाल पूछा आपको ज़हमत हुई
लेकिन उसके बाद मुझको और भी वहशत हुई

लुट चुके थे उनके मोती आबदीदा थी वहाँ
सीपियों की फिर ख़ुदा मालूम क्या हालत हुई

ख़ैर से जीने का हर अन्दाज़ आता था हमें
चैन से जी पर नहीं पाए 'अजब सूरत हुई

जो ज़माने भर को आईना दिखाते थे उन्हें
आइने के सामने आ कर बड़ी ख़िफ़्फ़त हुई

अब मेरे आँगन में चंचल चाँदनी खिलती नहीं
सुब्ह की ठंडी हवा आती नहीं मुद्दत हुई

अब 'सबा' इस शे'र का मक़बूल होना शर्त है
बात मेरी दिल-लगी की राई से पर्वत हुई

  - divya 'sabaa'

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