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SHER
सिगरेट की शक्ल में कभी चाय की शक्ल में इक प्यास है कि जिस को पिए जा रहे हैं हम — Ameer Imam
SHER
आज उस के गाल चू
में हैं तो अंदाज़ा हुआ
Tehzeeb Hafi
आज उस के गाल चू में हैं तो अंदाज़ा हुआ चाय अच्छी है मगर थोड़ा सा मीठा तेज़ है — Tehzeeb Hafi
SHER
एक मुझे ख़्वाब देखने के सिवा
चाय पीने की गंदी आदत है
Balmohan Pandey
एक मुझे ख़्वाब देखने के सिवा चाय पीने की गंदी आदत है — Balmohan Pandey
SHER
हमेशा ठंडी हो जाती थी चाय बातों बातों में
वो बातें जो इन आँखों से किया करते थे हम दोनों
Hasan Abbasi
हमेशा ठंडी हो जाती थी चाय बातों बातों में वो बातें जो इन आँखों से किया करते थे हम दोनों — Hasan Abbasi
SHER
सिगरटें चाय धुआँ रात गए तक बहसें
और कोई फूल सा आँचल कहीं नम होता है
Wali Aasi
सिगरटें चाय धुआँ रात गए तक बहसें और कोई फूल सा आँचल कहीं नम होता है — Wali Aasi
SHER
ठंडी चाय की प्याली पी के
रात की प्यास बुझाई है
Rais Farog
ठंडी चाय की प्याली पी के रात की प्यास बुझाई है — Rais Farog
SHER
इतनी दिलकश थी गुफ़्तगू उस की
चाय का कप भी सुन रहा था उसे
Hashim Raza Jalalpuri
इतनी दिलकश थी गुफ़्तगू उस की चाय का कप भी सुन रहा था उसे — Hashim Raza Jalalpuri
SHER
मैं कहीं गुम हूँ आजकल शायद
जल गए होंठ चाय पीते हुए
Mukesh Jha
मैं कहीं गुम हूँ आजकल शायद जल गए होंठ चाय पीते हुए — Mukesh Jha
SHER
चाय की प्याली में नीली टेबलेट घोली सह में सह में हाथों ने इक किताब फिर खोली — Bashir Badr
SHER
चाय पीते हैं कहीं बैठ के दोनों भाई
जा चुकी है ना तो बस छोड़ चल आ जाने दे
Ali Zaryoun
चाय पीते हैं कहीं बैठ के दोनों भाई जा चुकी है ना तो बस छोड़ चल आ जाने दे — Ali Zaryoun
SHER
आज फिर चाय बनाते हुए वो याद आया
आज फिर चाय में पत्ती नहीं डाली मैं ने
Taruna Mishra
आज फिर चाय बनाते हुए वो याद आया आज फिर चाय में पत्ती नहीं डाली मैं ने — Taruna Mishra
SHER
ज़िक्र तुम्हारा बहुत ज़रूरी इन ग़ज़लों में जानेमन
चाय बिना अदरक को डाले अच्छी थोड़ी बनती है
Tanoj Dadhich
ज़िक्र तुम्हारा बहुत ज़रूरी इन ग़ज़लों में जानेमन चाय बिना अदरक को डाले अच्छी थोड़ी बनती है — Tanoj Dadhich
SHER
घी मिस्री भी भेज कभी अख़बारों में
कई दिनों से चाय है कड़वी या अल्लाह
Nida Fazli
घी मिस्री भी भेज कभी अख़बारों में कई दिनों से चाय है कड़वी या अल्लाह — Nida Fazli
SHER
तुम्हारे साथ मुझ को चाय पीना है मगर
ये भी है शर्त कप सिर्फ़ एक होना चाहिए
Krishnakant Kabk
तुम्हारे साथ मुझ को चाय पीना है मगर ये भी है शर्त कप सिर्फ़ एक होना चाहिए — Krishnakant Kabk
SHER
बस एक रस्म-ए-तअल्लुक़ निभाने बैठे हैं
वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं
Waseem Nadir
बस एक रस्म-ए-तअल्लुक़ निभाने बैठे हैं वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं — Waseem Nadir
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