दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें
मेरे सीने तेरे सपने
तेरे सुख-दुख मेरे अपने
हर आशा को पाएँ साथी
दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें
ये घर अपना वो घर अपना
हीरा अपना कंकर अपना
मिल-जुल साथ निभाएँ साथी
दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें
भाई भाई बन के रहना
साथ ही मरना साथ ही जीना
मन से मन मिल जाएँ साथी
दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें
जो साथी भी छूट गया हो
बिन-कारन ही रूठ गया हो
उस को भी मनवाएँ साथी
दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें
Our suggestion based on your choice
our suggestion based on Haidar Bayabani
As you were reading Dosti Shayari Shayari