deep se deep jalaaen saa | दीप से दीप जलाएँ साथी

  - Haidar Bayabani

दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें
मेरे सीने तेरे सपने
तेरे सुख-दुख मेरे अपने
हर आशा को पाएँ साथी
दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें

ये घर अपना वो घर अपना
हीरा अपना कंकर अपना
मिल-जुल साथ निभाएँ साथी
दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें

भाई भाई बन के रहना
साथ ही मरना साथ ही जीना
मन से मन मिल जाएँ साथी
दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें

जो साथी भी छूट गया हो
बिन-कारन ही रूठ गया हो
उस को भी मनवाएँ साथी
दीप से दीप जलाएँ साथी
हर आँगन उजयारा कर लें
हर ज़र्रा मह-पारा कर लें

  - Haidar Bayabani

Dosti Shayari

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