सुना हम ने यहाँ अहल-ए-वफ़ाई कुछ नहीं होती
दिलों के पास जो रहते जुदाई कुछ नहीं होती
दिखावे है ज़माने के कि फेरे सात हैं झूठे
जिसे सच में निभाना है सगाई कुछ नहीं होती
चलो माना कि मरहम वक़्त है हर ज़ख़्म भर देगा
दिलों के घाव की लेकिन दवाई कुछ नहीं होती
अगर सच्ची इबादत हो ख़ुदा कैसे न पिघलेगा
फ़क़त इक चाहने भर से ख़ुदाई कुछ नहीं होती
कमाना तुम मुहब्बत को जहाँ पे राज करना भी
सुनो ये लोभ दौलत की कमाई कुछ नहीं होती
— Inshpa Ilahabadi















