तुम ने देखे हैं अगर हाथ पसारे हुए लोग
हाँ वही लोग हैं हालात के मारे हुए लोग
बस वही सब के जो हमराह थे साए की तरह
छोड़ कर हम को मुसीबत में किनारे हुए लोग
इब्न-ए-आदम तुझे मालूम है अज़मत उन की
तेरे माँ बाप थे जन्नत से उतारे हुए लोग
छोटी सी 'उम्र से पैरों पे खड़े हैं अपने
हम भी इक वक़्त थे इफ़्लास के मारे हुए लोग
इस बयाबान में महकेंगे गुलाबों की तरह
देख लेना मेरे हाथों के सँवारे हुए लोग
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