वो मोहब्बत में गिरफ़्तार हो भी सकता है

आदमी है तो गुनहगार हो भी सकता है

वक़्त के साथ बदलते हुऐ देखा है उसे
आज दुश्मन है तो कल यार हो भी सकता है

नया किरदार कहानी में उतर आया तो
ख़त्म देखो मेरा क़िरदार हो भी सकता है

हाकिमे वक़्त की जो मैं ने शिकायत की है
अब मुख़ालिफ़ मेरा अख़बार हो भी सकता है

— Irshad 'Arsh'

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