ये जबरन ख़ुश रहने का नाटक मुझ सेे न हो पाएगा
दर्द उठेगा जब दिल में आँखों से आँसू आएगा
जीवन का आधा हिस्सा मेरा आधा तुम रख लेना
आधा आधा होकर ही जीवन पूरा हो पाएगा
कितना कितना तेरा है घर कितना कितना मेरा है
जितना जितना पूछेंगे हम उतना घर जल जाएगा
— Jagat Singh














