ये दुनिया तुम को रास आए तो कहना

न सर पत्थर से टकराए तो कहना

ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल
समझ में जब ये आ जाए तो कहना

बहुत ख़ुश हो कि उस ने कुछ कहा है
न कह कर वो मुकर जाए तो कहना

बदल जाओगे तुम ग़म सुन के मेरे
कभी दिल ग़म से घबराए तो कहना

धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है
न पूरे शहर पर छाए तो कहना

— Javed Akhtar

More by Javed Akhtar

Other ghazal from the same pen

See all from Javed Akhtar →

Gham Shayari

Shers of gham.

All Gham Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling