ऐसा भी क्या मम्नून बस
करके गया है ख़ून बस
इक लाश में ज़िंदा हूॅं मैं
कर दो कोई मदफ़ून बस
नज़्में सुनाती वो रही
ग़ज़लों का मैं मफ़्तून बस
तुम मेरे हो अब मेरे हो
उसकी ये बातें दून बस
ये क्या कहा शाइर हूॅं मैं
शाइर कहॉं मजनून बस
बारह महीने इक तरफ़
और उसका माह-ए-जू'न बस
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