इक दफ़ा फिर से ये जुर्रत कर रहा हूँ
मैं किसी से फिर मुहब्बत कर रहा हूँ
कर चुके जंगल से हिजरत सब परिंदे
तेरी यादों से मैं हिजरत कर रहा हूँ
सच है ये उसने किया बर्बाद मुझ को
आज भी मैं उसकी इज़्ज़त कर रहा हूँ
है 'अजब मंज़र मिरे घर में कि ख़ुद ही
ख़ुद को अपने घर से रुख़्सत कर रहा हूँ
किस तरह मैं ज़िंदा हूँ कैसे हूँ याँ मैं
आप को दुनिया को हैरत कर रहा हूँ
चल रही है आँधी नफ़रत की यहाँ और
मैं चराग़ों की हिफ़ाज़त कर रहा हूँ
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