ik dafa phir se ye jurrat kar raha hooñ | इक दफ़ा फिर से ये जुर्रत कर रहा हूँ

  - Rovej sheikh

इक दफ़ा फिर से ये जुर्रत कर रहा हूँ
मैं किसी से फिर मुहब्बत कर रहा हूँ

कर चुके जंगल से हिजरत सब परिंदे
तेरी यादों से मैं हिजरत कर रहा हूँ

सच है ये उसने किया बर्बाद मुझ को
आज भी मैं उसकी इज़्ज़त कर रहा हूँ

है 'अजब मंज़र मिरे घर में कि ख़ुद ही
ख़ुद को अपने घर से रुख़्सत कर रहा हूँ

किस तरह मैं ज़िंदा हूँ कैसे हूँ याँ मैं
आप को दुनिया को हैरत कर रहा हूँ

चल रही है आँधी नफ़रत की यहाँ और
मैं चराग़ों की हिफ़ाज़त कर रहा हूँ

  - Rovej sheikh

Dushmani Shayari

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