Rovej sheikh

Rovej sheikh

@khudg4rzz

Rowej sheikh 'saad' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rowej sheikh 'saad''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

माथे से उस की आँख तक पहुँचा ही था घबरा के उस ने कह दिया अब यार बस — Rovej sheikh
ये तू किस दुश्मनी की दिल में कसक लाया है ज़ख़्म भरने के लिए यार नमक लाया है — Rovej sheikh
जहाँ पर था बसा मेरा मकाँ तन्हा मैं बेहतर से भी बेहतर था वहाँ तन्हा — Rovej sheikh
ख़ुद से मैं ने यूँँ तो सब को निकाल फेंका पर एक शख़्स तो अब भी उस की जैसी है मुझ में — Rovej sheikh
पूछ बैठा आज तो घर मेरा मुझ सेे तू कहाँ है क्यूँ अकेला रहता हूँ मैं — Rovej sheikh
तसव्वुर था उसे ख़ुद की मुकम्मल सी ग़ज़ल कहता नदामत है कि वो दुल्हन किसी की बन चुकी होगी — Rovej sheikh
तन्हा कमरे में सदा बैठ के रोने का मज़ा हम ग़रीबों के सिवा कौन समझ सकता है — Rovej sheikh
कर चुके जंगल से हिजरत सब परिंदे तेरी यादों से मैं हिजरत कर रहा हूँ — Rovej sheikh
न जाने मुझ को तेरे बा'द दोस्त ये हो क्या रहा तिरे लिए लिखा हुआ मैं ग़ैर को सुना रहा — Rovej sheikh
ख़ुदा जाने वो अब किधर जा रहे थे वो महफ़िल से उठ के मगर जा रहे थे — Rovej sheikh
आप को मैं बदला बदला लग रहा हूँ हर किसी को ऐसा लगता रहता हूँ मैं — Rovej sheikh

Ghazal

अभी वो हँस रही होगी बहुत ख़ुश हो रही होगी यक़ीनन उस के हाथों पर हिना भी रच गई होगी तसव्वुर था उसे ख़ुद की मुकम्मल सी ग़ज़ल कहता नदामत है कि वो दुल्हन किसी की बन चुकी होगी महल के कू-ब-कू उस के लगा रक्खे हैं पहरेदार महल जैसी क़फ़स में बैठ के अब रो रही होगी अमीरों से फ़क़ीरों सी मुहब्बत मिल नहीं सकती कहा भी था कि महलों में हमेशा तीरगी होगी मुहैया हो तो जाएँगे सभी आसाइशें उस को मगर वो बंद कमरे में मुझे तो ढूँढती होगी करेंगे तज़्किरा सब बारहा मेरी मुहब्बत का कहीं गर बज़्म में बातें वफ़ा की चल रही होगी हज़ारों कोशिशें कर ले भले मुझ को भुलाने की भुलाने का मुझे बस एक रस्ता ख़ुद-कुशी होगी — Rovej sheikh
अभी नींदें ही तो उस ने चुराई है मुसीबत तो अभी आनी ही बाक़ी है सहर हो जाए जब वो खोले हैं पलकें वो फैलाती हैं ज़ुल्फ़ें शाम ढलती है वो जब हँसती है तो दिन मुस्कुराता है वो जब रोती है तो बारिश हो जाती है मिरी ये ग़ज़लें सारी उस के सदक़े दोस्त वो भी तो मुझ पे नज़्में लिक्खा करती है मियाँ कोई बुरी आदत नहीं मुझ में फ़क़त सिगरेट से ही मेरी यारी है फ़क़त मुझ में बुराई है नहीं ऐसा यहाँ हर शख़्स में कुछ तो बुराई है गुज़रती है किसी कूचे से वो जब दोस्त तो चारों सम्त ख़ुशबू फैल जाती है दुबारा कह रहे हो तुम मुहब्बत को ज़रा हालत मिरी देखो न कैसी है — Rovej sheikh
जहाँ पर था बसा मेरा मकाँ तन्हा मैं बेहतर से भी बेहतर था वहाँ तन्हा दिखावे के बहुत हैं दोस्त रिश्तेदार हक़ीक़त में है हर इंसाँ यहाँ तन्हा गुमाँ करते हो क्यूँ तुम माल-ओ-दौलत पर यहाँ से तुम को जाना है मियाँ तन्हा महल से जा चुके सब जंग के ख़ातिर महल में रह गई हैं दासियाँ तन्हा भरी है दुनिया झूठों से यहाँ पर मैं सदाक़त की लिए बैठा दुकाँ तन्हा यहाँ पर सब अकेले ही तो आते हैं तिरा क्यूँ दिल नहीं लगता यहाँ तन्हा सनम जब से गए हो तुम तो लगता है कि जैसे रह गया है आस्ताँ तन्हा गुलों को ले गया है बाग़ से साहिब रहा अब बाग़ में बस बाग़बाँ तन्हा — Rovej sheikh

Nazm

'मतलबी' तेरा हुनर-ए-बेवफ़ाई अच्छा था वादों से मुकरना वाकई अच्छा था आज ये सब कैसे अरे बस ऐसे ही तुझे तो मालूम है न मैं कैसा हूँ , शायद अब मैं बिल्कुल तेरे जैसा हूँ मतलब पड़ने पर मैं तेरा हूँ मतलब ख़त्म होने पर ज़माने जैसा हूँ मैं ज़माने जैसा न बनता तो क्या करता मैं तुझ सा नहीं बनता तो क्या करता मैं कब तक तेरे लिए रोता रहता मैं आख़िर कब तक गलियों में, कूचों में, गाँव में, शहरों में, बाज़ारों में, खुले मैदानों में , जंगलों में, चर्च में, गुरुद्वारों में मस्जिदों में, मंदिरों में तुझे ढूँढ़ता रहता मैं अपनी ज़िन्दगी तेरे लिए क्यूँ बर्बाद करता फिर ज़ेहन में आया कि बदलना ही ठीक है तेरे हर वादों को भूलना ही ठीक है तेरी यादों को दिल से मिटाना ही ठीक है ज़माना मतलबी , दुनिया मतलबी हर शख़्स मतलबी तू भी मतलबी और अब मैं भी मतलबी — Rovej sheikh
"तेरी याद है" मैं हूँ ये काली अँधेरी रात है तन्हाई है और तेरी याद है मेरे हाथ में क़लम है पास में रखा एक गिलास है जो शराब से भरा है तुझे याद किए जा रहा हूँ शराब पीते हुए नज़्म लिखते जा रहा हूँ सुनो मेरे लिखे नज़्म तो पढ़ोगी ना ख़्वाबों में मुलाक़ात तो करोगी ना प्यार से न सही, नफ़रत से ही मुझे याद तो करोगी ना जब याद आए मेरी तो ये भी ख़याल करना मैं तेरी आवाज़ सुनने को परेशान रहता हूँ मैं तुझे एक बार देखना चाहता हूँ मैं चाहता हूँ कि तू फिर से मेरे सर पे हाथ फेरे मैं ये भी चाहता हूँ कि तू फिर से आए मेरे पास और आ कर फिर कभी न जाए पर ऐसा तो हो ही नहीं सकता ऐसा होना तो नामुम्किन है — Rovej sheikh