मुझे हर रोज़ अक्सर ऐसे ऐसे लोग मिलते हैं
कि महँगे कपड़ों में बस सस्ते सस्ते लोग मिलते हैं
निकलता हूँ कहीं तफ़तीश करने जब ग़रीबी का
वहाँ हर बार गहरी नींद सोए लोग मिलते हैं
मुहब्बत भी 'अजब शय है सुनो नादाँ मुहब्बत में
कभी ख़ुश पर कभी पंखे से लटके लोग मिलते हैं
मियाँ मुजरिम को याँ मासूम ही ठहराया जाता है
यहाँ की जेल में बस भोले भाले लोग मिलते हैं
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