mujhe har roz akshar aise aise log milte hain | मुझे हर रोज़ अक्सर ऐसे ऐसे लोग मिलते हैं

  - Rovej sheikh

मुझे हर रोज़ अक्सर ऐसे ऐसे लोग मिलते हैं
कि महँगे कपड़ों में बस सस्ते सस्ते लोग मिलते हैं

निकलता हूँ कहीं तफ़तीश करने जब ग़रीबी का
वहाँ हर बार गहरी नींद सोए लोग मिलते हैं

मुहब्बत भी 'अजब शय है सुनो नादाँ मुहब्बत में
कभी ख़ुश पर कभी पंखे से लटके लोग मिलते हैं

मियाँ मुजरिम को याँ मासूम ही ठहराया जाता है
यहाँ की जेल में बस भोले भाले लोग मिलते हैं

  - Rovej sheikh

Bhai Shayari

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