मैंने बदलता शख़्स अक्सर देखा है
अपनों के हाथों में ही ख़ंजर देखा है
यूँँ तो कई देखें बदलते लोगों को
तुम जिस तरह बदले हो कमतर देखा है
तुझ पे यक़ीं कैसे करूँँ कल शब तुझे
मैंने किसी के साथ बाहर देखा है
तुझ को बताऊँ और क्या क्या देखा है
लब उसके मैंने तेरे लब पर देखा है
गुज़रा मिरा मिट्टी में बचपन और तुम
कहते हो मैंने मिट्टी का घर देखा है
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