मैं लौटाऊँ क्या अब रहा क्या मिरे पास
सिवा ज़ख़्म के अब तिरा क्या मिरे पास
तू था जब मिरे पास तो था मैं कामिल
तू ही अब नहीं तो बचा क्या मिरे पास
तिरी यादें हैं और वो झूठे वादे
सिवा इन के हैं तीसरा क्या मिरे पास
किताबें, क़लम, कॉपी इन के सिवा और
बताओ कि तुम को मिला क्या मिरे पास
मिरी रूह जाते हुए ले गया तू
फ़क़त जिस्म ज़िंदा रहा क्या मिरे पास
— Rovej sheikh















