kaise pal bhar men ye faisla ho gaya | कैसे पल भर में ये फ़ैसला हो गया

  - Rovej sheikh

कैसे पल भर में ये फ़ैसला हो गया
मंज़िलें इक अलग रास्ता हो गया

कहता था वो कि पत्थर हूँ मैं देखो अब
मुझको ठोकर लगा आइना हो गया

बा-वफ़ा था मैं दुनिया की नज़रों में पर
मुझको उसने कहा बे-वफ़ा हो गया

लोग अक्सर ख़ुदा को नहीं मानते
जिसको भी जैसा उसने कहा हो गया

चाहता था वो बर्बाद करना मुझे
और उसने जो भी चाहा था हो गया

लिक्खा था मैंने दीवार पे मय हराम
अब वो कमरा मिरा मय-कदा हो गया

जो शब-ओ-रोज़ ज़ुल्म-ओ-सितम ढाता था
'साद' अब वो सितमगर ख़ुदा हो गया

  - Rovej sheikh

Khuda Shayari

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