गर बिना मतलब मुझे महफ़िल से उठ कर जाना है
तो नहीं जाना कहीं भी मुझको फिर मर जाना है
एक अरसे बाद दिल से आई है आवाज़ कुछ
अब तो याँ से लौट जाओ हमको अब घर जाना है
काँ से काँ मैं आ गया हूँ तुम सेे मिलने के लिए
एक तुम हो दोस्त तुमको आज दफ़्तर जाना है
और फिर हम जाने अंजाने से मिल जाएँ कहीं
तो तुम्हें मुझ को नज़र-अंदाज़ फिर कर जाना है
अब परेशाँ हो गया हूँ तेरी इन यादों से मैं
अब तिरी बेदर्द इन यादों से बाहर जाना है
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