मुझे जो हो रहा है ये किसी को क्यूँ बताना है
वफ़ा के नाम पर ही तो मुझे गर्दन कटाना है
जहाँ चाहो ख़ुशी से तुम चले जाना मगर सुन लो
हमारे बीच जो कुछ है हुआ तुम को मिटाना है
किया था एक वा'दा जो अगर कुछ याद हो तुम को
खिंचाए साथ जो तस्वीर उनको फिर जलाना है
अभी तो जा रही हो तुम मगर इक रोज़ यूँँ होगा
तुम्हें फिर देखना मेरी कहानी गुनगुनाना है
सितमगर, बेरहम, ज़ालिम, न जाने और क्या हो तुम
तुम्हीं में आदतें हैं ये कि ऐसा ही घराना है
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