mujhe jo ho raha hai ye kisi ko kyun bataana hai | मुझे जो हो रहा है ये किसी को क्यूँ बताना है

  - Rovej sheikh

मुझे जो हो रहा है ये किसी को क्यूँ बताना है
वफ़ा के नाम पर ही तो मुझे गर्दन कटाना है

जहाँ चाहो ख़ुशी से तुम चले जाना मगर सुन लो
हमारे बीच जो कुछ है हुआ तुम को मिटाना है

किया था एक वा'दा जो अगर कुछ याद हो तुम को
खिंचाए साथ जो तस्वीर उनको फिर जलाना है

अभी तो जा रही हो तुम मगर इक रोज़ यूँँ होगा
तुम्हें फिर देखना मेरी कहानी गुनगुनाना है

सितमगर, बेरहम, ज़ालिम, न जाने और क्या हो तुम
तुम्हीं में आदतें हैं ये कि ऐसा ही घराना है

  - Rovej sheikh

Aawargi Shayari

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