मेरी ही क़त्ल की तो साज़िश है
एक उनकी यही तो ख़्वाहिश है
और तो तुझ से माँगू क्या या रब
भूल जाऊँ उसे गुज़ारिश है
जल भी सकते हो उसको छूना मत
दोस्त पानी नहीं वो आतिश है
साथ हूँ रहता सबके खुश मैं हाँ
हाँ मुझे आपसे ही रंजिश है
ढल जवानी तिरी भी जाएँगी
जिस जवानी पे तुमको नाज़िश है
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