laga ke zakham par jaanaan namak hañskar ghazal kehna | लगा के ज़ख़्म पर जानाँ नमक हँसकर ग़ज़ल कहना

  - Rovej sheikh

लगा के ज़ख़्म पर जानाँ नमक हँसकर ग़ज़ल कहना
बहुत होता है मुुश्किल फिर सनम तुझपर ग़ज़ल कहना

सजी होती है इक महफ़िल पुराने यार होते हैं
वही पीना पिलाना और ज़ियादा-तर ग़ज़ल कहना

दुआएँ काम आती हैं न फिर कोई दवाएँ ही
मरीज़-ए-इश्क़ गर वो हो तो चारा-गर ग़ज़ल कहना

सुनाएँ हैं मुझे तुमने हज़ारों मर्तबा क़िस्से
मिलो जब इस दफ़ा मुझ से मिरे दिलबर ग़ज़ल कहना

  - Rovej sheikh

Kahani Shayari

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