ab isliye bhi man mira lagta nahin | अब इसलिए भी मन मिरा लगता नहीं

  - Rovej sheikh

अब इसलिए भी मन मिरा लगता नहीं
इस शहर में कोई रहा अपना नहीं

कोई नहीं है तो सताओगे मुझे
देखो सताना इस तरह अच्छा नहीं

अब कौन ही इस दुनिया में सच्चा रहा
अब तो किसी पर भी यकीं होता नहीं

परखो उसे तुम दोस्ती जिस सेे करो
दिखता है जैसा वैसा वो होता नहीं

खु़श-हाल है ये ज़िंदगी तू कह रहा
तूने अभी माज़ी मिरा देखा नहीं

उम्मीद है वो लौट आएगा कभी
उम्मीद का पौधा अभी सूखा नहीं

  - Rovej sheikh

Aitbaar Shayari

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