jo likha deewaron pe tha naam teraa mit raha hai | जो लिखा दीवारों पे था नाम तेरा मिट रहा है

  - Rovej sheikh

जो लिखा दीवारों पे था नाम तेरा मिट रहा है
तू भी यानी मेरे दिल से रफ़्ता-रफ़्ता मिट रहा है

रेत पे लिक्खा हुआ वो नाम मिट जाता है जैसे
वैसे ही तो मेरे दिल से तेरा चेहरा मिट रहा है

ज़ेहन से बातें भी यादें भी तिरी अब मिट चुकी हैं
ज़ेहन से अब मेरे तेरे घर का नक़्शा मिट रहा है

मिट चुके हैं 'इश्क़ में उसके मिरे जैसे कई लोग
और अब तो सल्तनत का शाहज़ादा मिट रहा है

  - Rovej sheikh

Dil Shayari

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