the jo is bastii ke sab baashinde kahaan ga.e | थे जो इस बस्ती के सब बाशिंदे कहाँ गए

  - Rovej sheikh

थे जो इस बस्ती के सब बाशिंदे कहाँ गए
यानी दरख़्त पर से परिंद सारे कहाँ गए

बरसों के बाद लौटा हूँ अपने गाँव और अब
उनकी तलाश जो यार थे पुराने कहाँ गए

मैदान गाँव के ख़ाली ख़ाली है आख़िर क्यूँ
मिट्टी से खेलने वाले सब बच्चे कहाँ गए

तुमको गुमान था वो तेरे अपने हैं तो फिर
ए मुंतज़िर बता तेरे वो अपने कहाँ गए

दरिया के पार यार मेरा तन्हा बैठा है
कश्ती है लेकिन मल्लाहें सारे कहाँ गए

  - Rovej sheikh

Shehar Shayari

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