मुझे जिस सेे मुहब्बत है मुहब्बत है
करें क्या जिस को नफ़रत है मुहब्बत है
उसे किस की ज़रूरत है बताऊँ मैं
उसे जिस की ज़रूरत है मुहब्बत है
ख़ुदा तुझ से शिक़ायत क्यूँ करूँ मैं अब
अगर मुझ पे ही ग़ुर्बत है मुहब्बत है
जहाँ ख़तरा है जाने से वाँ जाने की
मुझी को तो नसीहत है मुहब्बत है
मुहब्बत करने की गर उस सितमगर से
किसी में दोस्त हिम्मत है मुहब्बत है
कोई दिक्कत नहीं है मुझ को उस से दोस्त
अगर वो बे-मुरव्वत है मुहब्बत है
तू चल अब मौत आके बोली मुझ से कल
ग़मों से या'नी रुख़्सत है मुहब्बत है
— Rovej sheikh















