tu rulaati hai bahut hansaati tu kabhi nahin | तू रुलाती है बहुत हँसाती तू कभी नहीं

  - Rovej sheikh

तू रुलाती है बहुत हँसाती तू कभी नहीं
ख़ैर मेरी ज़िंदगी तू इतनी भी बुरी नहीं

तेरे नाम से तुझे पुकारता हूँ मैं मगर
तू मुझे पलट के इक दफ़ा भी देखती नहीं

खा चुकी है मुफ़लिसी मिरी ही सारी ख़्वाहिशें
अब किसी भी चीज़ की मुझे तलब रही नहीं

दिन जवानी के सुने थे ये मज़े के होते हैं
पर जवानी ये मिरी मिरी जवानी ही नहीं

इस नए मकान में बनी हैं तीन खिड़कियाँ
भूले भटके इक दफ़ा ख़ुशी भी झाँकती नहीं

  - Rovej sheikh

Shaheed Shayari

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