मुसलसल कोशिशों के बा'द मैं उस बाब तक पहुँचासो फिर जाके कहीं जाना मैं तेरी ख़्वाब तक पहुँचाख़ुदा जाने कहाॅं खो बैठा था 'रोवेज' मैं ख़ुद कोसो ख़ुद की जुस्तुजू करते हुए महताब तक पहुँचा— Rovej sheikh