चाहता हूँ मैं कि इक जलता दिया रह जाएदर्द ये घाव मिरा ज़ख़्म हरा रह जाएबद-दुआ है ये मुहब्बत हो किसी से तुझ कोरूह ले जाए वो बस जिस्म तिरा रह जाए— Rovej sheikh