"तेरी याद है"
मैं हूँ
ये काली अँधेरी रात है
तन्हाई है और तेरी याद है
मेरे हाथ में क़लम है
पास में रखा एक गिलास है
जो शराब से भरा है
तुझे याद किए जा रहा हूँ
शराब पीते हुए
नज़्म लिखते जा रहा हूँ
सुनो
मेरे लिखे नज़्म तो पढ़ोगी ना
ख़्वाबों में मुलाक़ात तो करोगी ना
प्यार से न सही, नफ़रत से ही
मुझे याद तो करोगी ना
जब याद आए मेरी तो
ये भी ख़याल करना
मैं तेरी आवाज़ सुनने को परेशान रहता हूँ
मैं तुझे एक बार देखना चाहता हूँ
मैं चाहता हूँ कि तू फिर से मेरे सर पे हाथ फेरे
मैं ये भी चाहता हूँ कि तू फिर से आए
मेरे पास और आ कर फिर कभी न जाए
पर ऐसा तो हो ही नहीं सकता
ऐसा होना तो नामुम्किन है















