इतने मासूम चेहरे दिखाने लगे
अपने दिल में हमें वो बसाने लगे
जिस को देखा था वो ही कहीं तो नहीं
जिस के नज़दीक हम ख़ुद ही जाने लगे
अपनी नज़रों से मुझ को दिखा के नज़र
मुझ को अपना दिवाना बनाने लगे
सामने देख के अपनी उस को कहीं
अपनी नज़रें हम उन से चुराने लगे
उन की नज़रों से नज़रें मिलाए नहीं
ख़ुद ही नज़रें वो मुझ से मिलाने लगे
— Mahmood munja















