bande ko ishq men to chadha hai diwanaapan | बन्दे को इश्क़ में तो चढ़ा है दिवानापन

  - Harsh Kumar Bhatnagar

बन्दे को इश्क़ में तो चढ़ा है दिवानापन
आँखों में खो गया है न देखे लब-ओ-दहन

कब तक मैं चाँद में ही निहारूँगा बस तुझे
घर में न जाने तेरा भी कब होगा आगमन

उसके भी दिल में मेरे लिए कुछ तो ख़ास है
मिलने वो आती चुपके से करके इशारतन

दिल तोड़ने का फ़न तो कभी सीखा ही नहीं
हँस कर गले लगाना ही मेरा है फ़ितरतन

बस आप ही के कहने पे चल कर हैं आए हम
अब यूँँ न कहना लड़के में थोड़ा है भोलपन

हर दिन वो साल मुझ को बड़ा याद आता है
इस फ़रवरी के माह में बिछड़े थे दो बदन

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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