khufuta naseeb aur zamaane kii maslahat | ख़ुफ़्ता नसीब और ज़माने की मस्लहत

  - Harsh Kumar Bhatnagar

ख़ुफ़्ता नसीब और ज़माने की मस्लहत
इस पाँव को ज़रूरी है जूते की मस्लहत

जो दर्द से गुज़र रहा है जानता है ग़म
बहरे ने इसलिए है ली गूँगे की मस्लहत

हर लफ़्ज़ के यहाँ पे मआनी हज़ार हैं
लेते कभी कभार हैं नुक़्ते की मस्लहत

ख़ुद ऊँट भी भटक रहे हैं जा-ब-जा वहाँ
कैसे मिलेगी आप को साए की मस्लहत

दीवार मत गिरा मिरे ख़्वाबों की जान-ए-जाँ
पहले ही ले चुका हूँ मैं क़र्ज़े की मस्लहत

इन आँसुओं से सिर्फ़ वरक़ ही भरे गए
ऐ काश लेता मैं किसी शाने की मस्लहत

बंदा भी इक मशीन की मानिंद है ख़ुदा
चलता नहीं बिना किसी पुर्ज़े की मस्लहत

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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